नाम शराफत अली था
उसी ने लगाई थी
दंगों के वक्त
मंदिर में आग .
आज उसी मंदिर की
मुंडेर पर आशियाना बना रहा है
कबूतर बनकर .
आप सोच रहे हो कि
मुझे यह किसने बताया
ज़नाब,
शराफत अली मैं ही था .
उसी ने लगाई थी
दंगों के वक्त
मंदिर में आग .
एक दिन मर गया वह .
कमबख्तआज उसी मंदिर की
मुंडेर पर आशियाना बना रहा है
कबूतर बनकर .
आप सोच रहे हो कि
मुझे यह किसने बताया
ज़नाब,
शराफत अली मैं ही था .
-- ajit pal singh daia
bahut badiya chitansheel prastuti...
ReplyDeletehaardik shubhkamnayen..
sir, ishme kuchh raaz chhipa h.....
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