Saturday, May 9, 2009

हाइकु


आँगन में मोर ।

मां ने डाली होगी ज्वार

जग कर अल भोर ।

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रात में चूहों का गीत।

कुतर रहे होंगे सभी

दादा का पुराना सितार ।

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मेरी पतंग नहीं उडी ।

कल शाम को

वोह छत पर नहीं आई।

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दाल में मिर्ची ठीक ।

एक चम्मच नमक डाल

पत्नी पर झल्लाया ।

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तुम्हारी आंखों में आकाश

मैंने ऊपर देखा तो

ऊपर भी आकाश ।

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3 comments:

  1. bahut khoob likhi hain ye triveniyan...badhai

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  2. wah bhaut hi alag style hai aapki writing ka...bahut dilchasp

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  3. बन्धुवर ये हाइकु नहीं है । कृपया हाइकु के लिए
    हिन्दी हाइकु देखिएगा-http://hindihaiku.wordpress.com/

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