Tuesday, March 31, 2009

बरसात की शाम


बरसात की उस शाम

छत पर खड़े होकर

धनुक को निहारते हुए

मुझे लगा कि

तुम मुस्कुराई हो

अपने गांव में

रोटी रोटी बेलते बेलते

मुझे याद करते

विस्मित सी

ठहरी हुई लम्हा लम्हा

ह्श्श ! ! ! !
तवे पर रखी

तुम्हारी रोटी जल रही है

दालान में बेठी

तुम्हारी माँ महसूस कर रही है ।


अजीत पाल सिंह दैया

7 comments:

  1. ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
    लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
    जितनी अच्छी कविता उतने ही अच्छे चित्र है । बधाई !

    ReplyDelete
  2. ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
    लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
    जितनी अच्छी कविता उतने ही अच्छे चित्र है । बधाई !
    http://tarachandkitruestory.blogspot.com/

    ReplyDelete
  3. मेरी सांसों में यही दहशत समाई रहती है
    मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा।
    यूँ ही खिंचती रही दीवार ग़र दरम्यान दिल के
    तो सोचो हश्र क्या कल घर के आँगन का होगा।
    जिस जगह की बुनियाद बशर की लाश पर ठहरे
    वो कुछ भी हो लेकिन ख़ुदा का घर नहीं होगा।
    मज़हब के नाम पर कौ़में बनाने वालों सुन लो तुम
    काम कोई दूसरा इससे ज़हाँ में बदतर नहीं होगा।
    मज़हब के नाम पर दंगे, सियासत के हुक्म पे फितन
    यूँ ही चलते रहे तो सोचो, ज़रा अमन का क्या होगा।
    अहले-वतन शोलों के हाथों दामन न अपना दो
    दामन रेशमी है "दीपक" फिर दामन का क्या होगा।
    @कवि दीपक शर्मा
    http://www.kavideepaksharma.co.in (http://www.kavideepaksharma.co.in/)
    इस सन्देश को भारत के जन मानस तक पहुँचाने मे सहयोग दे.ताकि इस स्वस्थ समाज की नींव रखी जा सके और आवाम चुनाव मे सोच कर मतदान करे.
    काव्यधारा टीम

    ReplyDelete
  4. bahut achha likha hai apne..aur ummid hai ki age bhi is se badhiya lekh likhte rahenge....bahut bahut subhkamnay...sankar-shah.blogspot.com

    ReplyDelete
  5. सादर अभिवादन
    सबसे पहले तो आपकी रचना के लिए ढेरो बधाई
    ब्लोग्स के नए साथियो में आपका बहुत बहुत स्वागत

    चलिए एक मुक्तक से अपना परिचय करा रहा हूँ

    चले हैं इस तिमिर को हम , करारी मात देने को
    जहां बारिश नही होती , वहां बरसात देने को
    हमे पूरी तरह अपना , उठाकर हाथ बतलाओ
    यहां पर कौन राजी है , हमारा साथ देने को

    सादर
    डा उदय ’मणि’ कौशिक
    http://mainsamayhun.blogspot.com

    ReplyDelete
  6. अच्छी कविता, स्वागत ब्लॉग परिवार में.

    ReplyDelete
  7. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    ReplyDelete