Tuesday, April 7, 2009

हवाएं

हवाएं

इठलाती हैं

इतराती हैं

मदमाती हैं

ज़रूर, तेरा आँचल

उड़ा कर आई हैं।

--अजीत पाल सिंह दैया

1 comment:

  1. yar peom tho bahut achha hai
    lekin ladaki bhi masth yar

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